22 जनवरी 2020 - 18:35
शाहीन बाग़ के प्रदर्शन में मौजूद बच्चों की काउंसिलिंग की जाए: बाल संरक्षण आयोग

भारत के राष्ट्रीय बालाधिकार संरक्षण आयोग का कहना है कि दिल्ली के शाहीन बाग़ में सीएए के विरुद्ध प्रदर्शनों में देखे गए गए बच्चों की पहचान करके उनकी काउंसिलिंग की जाए।

एनसीपीसीआर ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के ज़िलाधिकारी को आदेश जारी कर कहा है कि संभव है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद बच्चों को अफ़वाहों और ग़लत जानकारी के कारण मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा हो।

आयोग के अध्यक्ष प्रियांक क़ानूनगो ने कहा कि मंगलवार को जारी आदेश वायरल वीडियो पर आधारित है जिनमें बच्चों को प्रधानमंत्री हमको देश से निकाल देंगे और होम मिनिस्टर को काग़ज़ नहीं दिखाएंगे तो वो हमें डिटेंशन कैंप में भेज देंगे, जैसी बातें कह रहे हैं। यह नागरिकता क़ानून के संदर्भ में अफ़वाहों का प्रभाव है। इससे बच्चों के प्रभावित होने और उनका इस तरह की बातों को कहना चिंताजनक है। क़ानूनगो ने कहा कि हमें विश्वास है कि बच्चों को काउंसिलिंग की ज़रूरत है, अगर ज़रूरत पड़ी तो उनके माता-पिता को भी काउंसिलिंग के लिए भेजा जाएगा।

कानूनगो ने कहा कि यह स्पष्ट है कि इस तरह की अफवाहों की वजह से बच्चे ट्रॉमा से जूझ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसके लिए काउंसिलिंग केंद्र उपलब्ध हैं। आदेश में कहा गया है कि इस मुद्दे की गंभीरता और बच्चों पर इसके प्रभाव को देखते हुए इन बच्चों की पहचान कर इन्हें काउंसिलिंग सेंटर भेजने की व्यवस्था करने के लिए ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी और पुलिस चाइल्ड वेलफेयर ऑफ़िसर को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया जाता है।

ज्ञात रहे कि शाहीन बाग़ में महिलाओं के साथ बच्चों के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर स्कूली बच्चों के माता-पिता ने दिल्ली पुलिस के समक्ष चिंता जताते हुए कहा था कि इससे उनके स्कूल जाने वाले बच्चों पर असर पड़ता है। इसके बाद पांच महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की थी।